सड़क पर अतिक्रमण को लेकर रार, भू स्वामी ने अपनी भूमि बताकर की नगर निगम की बनाई सड़क व सिंचाई गूल पर तारबाड़

सड़क पर अतिक्रमण को लेकर रार, 

भू स्वामी ने अपनी भूमि बताकर की नगर निगम की बनाई सड़क व सिंचाई गूल पर तारबाड़ 



सड़क को लेकर 2014 से भूस्वामी, सिंचाई विभाग और पड़ोसियों में अतिक्रमण को लेकर चल रहा विवाद 
 सरकारी मदद से दो बार बनी सड़क को कार्यदाई संस्थाओं द्वारा एनओसी न लेने के कारण हो रहा विवाद 



कोटद्वार। सार्वजनिक निर्माण कार्यों में सरकारी विभागों द्वारा निजी भूमियों में कराए गए निर्माण कार्य आम जनता के लिए तब विवाद का कारण बनने लगते हैं जब कार्यदाई संस्थाओं द्वारा हूं स्वामियों से एनओसी न लेकर ठेकेदारों और और सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों के दवाब/फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों को ताक पर रख कर निर्माण कार्य करवा दिया जाता है। ऐसे विवादित मामले विशेषकर नव निर्मित कालोनियों, मौहल्लों और गांव शहर के वार्डों में देखने को मिलते हैं। 
 एक ऐसा ही कुछ मामला कोटद्वार के पदमपुर सुखरौ क्षेत्र वार्ड नं 20 के जनशक्ति विहार,लेने नं 3 में देखने को मिल रहा है। हमारे संवाददाता को मिले शिकायती पत्रों के आधार व पूर्व में विभागीय कार्यवाही के अनुसार मामला 2013-14 से विवादित जान पड़ता है। 
 शिकायतकर्ता मीनाक्षी चमोली के द्वारा 16 मार्च 2026 में नगर निगम, सिंचाई विभाग व उपजिलाधिकारी को दिए शिकायती प्रार्थना पत्र में जनशक्ति विहार की सरस्वती देवी पर निगम के द्वारा बनाई गई सड़क पर अतिक्रमण कर तारबाड़ कर मार्ग अवरूद्ध करने का आरोप लगाया है। वहीं इस संबंध में 2013-14 में कोटद्वार उपजिलाधिकारी पूर्ण सिंह राणा के आदेश की प्रति संलग्न कर जानकारी दी गई कि उस दौरान भी सड़क अवरुद्ध कर दीवार लगाकर लोगों की आवाजाही रोकने का कार्य सुवा था जो कि उपजिलाधिकारी के आदेश से खुल गया था।

 इस मामले में जो खामियां प्रमुख रूप से उजागर हो रही है वह कार्यदाई संस्थाओं, ठेकेदारों और जनप्रतिनिधियों की प्रमुख नजर आ रही हैं। सबसे पहले जनप्रतिनिधि द्वारा मामला विवादित श्रेणी में होने के वावजूद मौहल्ले के समस्त लाभार्थियों से मिटिंग कर प्रस्ताव न बनाना ! कार्यदाई संस्था द्वारा सड़क बनाने वाली भूमि में हूं स्वामियों द्वारा एन ओ सी न लेना व ठेकेदार द्वारा भी आधे अधूरे नियमों के आधार पर कार्य करवा देना। सड़क निर्माण में विवादित मामले में जहां जनप्रतिनिधि दवाब बनाने का काम कर अपने निजी राजनीतिक स्वार्थ साधने का काम करते हैं वहीं विभाग भी अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ देने के लिए जनप्रतिनिधियों के दवाब में नियमों को ताक पर रख देते हैं, खामियाजा भुगतते हैं सड़क से लाभान्वित होने वाले मौहल्ले वासी आम नागरिक जो सुविधा म गई मिलने के बाद भी सुविधाएं लेने को तंरसते हैं, अर्थात "कुंवा होने के बाद भी प्यासे रहना "

 जब मामले ने तूल पकड़ना शुरू हुआ तो वार्ड पार्षद 20 प्रेमा खंतवाल ने सिंचाई विभाग, लोकनिर्माण विभाग,नगर निगम कोटद्वार, उपजिलाधिकारी कोटद्वार व कोटद्वार कोतवाली में तहरीर देते हुए मामले में समुचित कार्यवाही को प्रार्थना पत्र दिया है। वहीं सिंचाई विभाग ने पानी सिंचाई गूगल क्षतिग्रस्त होने व अतिक्रमण मुक्त करने का अतिक्रमणकारी आरोपी को एक सप्ताह का नोटिस दिया है। अब देखना यह है कि सड़क खुलवाने के लिए जिम्मेदार विभागों में कौन कितना समय लेता है और सड़क पर आवाजाही आमजन के लिए सुलभ हो पाएगी।

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