कोटद्वार में शहीद जवान का घोर अपमान
कोटद्वार गढ़वाल में शहीद कुमाऊनी परिवार होने के भेदभाव का हो रहा शिकार
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद 2002 दौरान जम्मू-कश्मीर में हुआ था नरेंद्र शहीद
उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री से लेकर वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष ने भी की है अनदेखी और भेदभाव
कोटद्वार नगरनिगम के पूर्व मेयर शहीद के नाम पर बोर्ड लगाकर पल्ला झाड़ा तो वर्तमान मेयर ने अभी तक नहीं ली सुध
शहीद नरेंद्र की मां और भाई पिछले 24 वर्षों से पत्राचार और गुहार लगाते लगाते हुए बेहाल
पूर्व सैनिक संगठन और जिला सैनिक एवं पुनर्वास कार्यालय, लैंसडाउन ने भी शहीद की शहादत को भुलाया
कोटद्वार। उत्तराखंड सैनिक बाहुल्य राज्य होने के साथ देश सेवा के जान न्यौछावर करने में पूरे देश में सर्वश्रेष्ठ राज्य माना जाता है। उत्तराखंड का हर सैनिक जवान सदेश की सीमाओं पर सर्दी, गर्मी और बरसात की विषम परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं पर रक्षा करने के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना अपनी जान की बाजी लगाने से गुरेज नहीं करते। यही कारण है कि आज पूरे उत्तराखंड में बलिदानी शहीदों से हर गांव शहर गर्व करता है।
आज लोक संवाद टुडे आपको केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय सरकार की सैनिकों, शहीद सैनिकों और उनके परिजनों के नाम पर राजनीति और वाहवाही लूटने की कहानी बयां कर रहा है। यही नहीं जाति,वर्ण और क्षेत्रवाद के नाम पर शहीदों की विरासत को कैसे निजी स्तेमाल के लिए भुनाते हैं वह सब आपको कोटद्वार में हुई एक शहीद सैनिक उसके परिवार के प्रति हुई शर्मनाक राजनीतिक करतूत से रूबरू करवा रहे हैं।
मामला कोटद्वार विधानसभा और नगरनिगम क्षेत्रांतर्गत वार्ड नं 3 लालपानी पल्ली का है जहां आजादी से पूर्व कुमाऊंनी परिवार रहते हैं उन्हीं में से एक स्व.हयात सिंह अधिकारी का परिवार भी रहता आया है। हयात सिंह के चार बेटों में से दो बेटे देश सेवा के लिए सेना में भर्ती हो गए। दूसरे नं के बेटे तो सेवानिवृत्ति होकर आ गये। तीसरे नंबर के बेटा भी सेवा के दौरान 2002 में जम्मू-कश्मीर के उपरी सेक्टर में 7 अक्टूबर को सीमा पर पाकिस्तानी सैनिकों की गोलीबारी देश की रक्षा करते हुए बलिदान हो गए।
बताते चलें कि शहीद सैनिक राइफलमैन नरेंद्र सिंह सैन्य सं. 4567844 K के 2002मे उरी सेक्टर में शहीद होने के बाद उस दौरान की केन्द्र सरकार और राज्य सरकार शहीद के सम्मान में परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और शहीद स्मारक बनाने का वादा किया परन्तु दो बार भाजपा तो दो बार कांग्रेस ने शहीदों और सैनिकों के नाम पर सत्ता सुख तो होगा परन्तु जिनकी शहादत के बलबूते पूरे देशवासी अपने को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं उनपर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। उत्तराखंड में कोटद्वार विधानसभा से दो बार कैबीनेट मंत्री बनने वाले और कोटद्वार से ही सैनिक पुत्री विधानसभा अध्यक्ष ने भी केवल सैनिक और शहीद सैनिक संज्ञान होने के वावजूद भी अनदेखी से साफ पता चलता है कि या तो शहीदों को सम्मान देना इनके आचरण में नहीं या फिर....। यही नहीं शहीद नरेंद्र का क्या गढ़वाल में रहकर कुमाऊनी शहीद सैनिक होना गुनाह था....?
पहले नगरनिगम बनने के बाद स्थानीय पार्षद और पहले मेयर हां ज़रूर शहीद के नाम पर सड़क बनाने के बोर्ड जरूर लगवा दिया। अब यह बोर्ड झाड़ियों के बीच नगरनिगम की कार्यशैली की शोभा बढ़ा रहा है। वर्तमान पार्षद ने औपचारिक प्रस्ताव और विधानसभा अध्यक्ष को दिए ज्ञापन पर अपनी सहमति दी है परन्तु नगरनिगम बोर्ड बैठक शायद ही कोई दिया है। कोटद्वार की नगरनिगम सरकार और विधानसभा अध्यक्ष व भाजपा सरकार का तो लगता है कुमाऊं क्षेत्रों से बहुत एलर्जी है। शहीद नरेंद्र के बड़े सैनिक भाई सूबे. पूरन सिंह अधिकारी का कहना है कि उनके द्वारा और उनकी माता द्वारा 2003 से शहीद सैनिक नरेंद्र के नाम सड़क, पुलिया और स्मारक बनाने की मांग कई बार की गई परन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुई। पत्राचार के दौरान शहीद के पिता का स्वर्गवास हो गया,माता का मानसिक स्वास्थ्य व स्मरण शक्ति बहुत कमजोर हो गई। शहीद के नाम पर सड़क बनाने के लिए स्थानीय लोगों ने अपनी भूमि पर सड़क बनाने के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र तक भी दिया है परन्तु न विधायक निधि,न राज्य सरकार ने ही नगर निगम शहीद को सम्मान ने को तैयार है।
इसके अलावा पूर्व सैनिकों के नाम पर बने विभिन्न संगठन,समीतियां व परिषद भी केवल राजनीतिक मोहरा बनाकर सैनिकों और शहीदों के नाम पर नोबल मिडिया, अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं।
24 सालों में जब एक देशभक्त शहीद को सम्मान न मिले और उसका राजनीतिक, जातिगत,क्षेत्रगत बंटवारा किया जाए तो बहुत खेदजनक, शर्मनाक है। लोक संवाद टुडे सभी जिम्मेदार संस्थाओं, विभागों राजनीतिक दलों से अनुरोध करता है कि समाज में बंटवारे के बजाय एकता भाईचारे का संदेश दो जिससे सभी समाज शांतिपूर्ण ढंग से रह सकें।
पुष्कर सिंह पवार "पद्म"



0 Comments