गैरसैंण राजधानी की मांग को लेकर IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी के अनशन को मिला NSUI छात्रों का समर्थन

 गुरुवार को अनशन पर पूर्व मुख्यमंत्री के बैठने से प्रशासनिक अमले में हलचल 



देहरादून।  राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर एकता विहार धरना स्थल पर चल रहा आंदोलन जन-क्रांति का रूप लेने लगा है। बुधवार को पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी के क्रमिक अनशन को NSUI के छात्र संगठन ने अपना पूर्ण समर्थन देते हुए सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे छात्रों ने सरकार विरोधी नारों से आसमान गुंजा दिया, जिससे शासन-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।

अनशन स्थल से गरजते हुए विनोद प्रसाद रतूड़ी ने सीधा भाजपा सरकार पर हमला बोला और कहा कि अगर सरकार प्यार से राजधानी गैरसैंण घोषित नहीं करती है, तो अब इसे छीन कर लिया जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के विजन पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ 'विकसित भारत' का ढिंढोरा पीटा जा रहा है और दूसरी तरफ उत्तराखंड की आत्मा यानी गैरसैंण को पिछले 25 सालों से 'अस्थाई' के अंधेरे में रखा गया है। रतूड़ी जी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि पहाड़ का पानी और जवानी अब केवल वादों के लिए नहीं, बल्कि अपने हक के लिए कुर्बान होगी।

प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए रतूड़ी जी ने सरकार की संवैधानिक पोल भी खोली। उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 2, 3 और 12 में राज्यों के गठन और संचालन की व्यवस्था तो है, लेकिन पूरे संविधान में 'अस्थाई राजधानी' जैसा कोई शब्द या प्रावधान नहीं है। भाजपा सरकार संविधान के साथ खिलवाड़ कर रही है और देहरादून को जबरन राजधानी बनाकर पहाड़ की जनता के साथ धोखा कर रही है। यह कानूनी रूप से गलत है और जनता अब इस झूठ को बर्दाश्त नहीं करेगी।

आंदोलन की बढ़ती धमक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि   प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एक पूर्व मुख्यमंत्री रतूड़ी के अनशन को समर्थन के साथ अनशन में शामिल होने के ऐलान ने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। NSUI के छात्र नेताओं ने भी साफ कर दिया है कि रतूड़ी जी की यह लड़ाई अब हर युवा की लड़ाई है और जब तक गैरसैंण को स्थायी राजधानी का दर्जा नहीं मिल जाता, तब तक यह धरना समाप्त नहीं होगा।