आरटीआई में भ्रामक और अधूरी सूचना देना पड़ा मंहगा, लगा 25000 का जुर्माना

 आरटीआई में भ्रामक और अधूरी सूचना देना पड़ा मंहगा, लगा 25000 का जुर्माना 

पौड़ी महिला सशक्तिकरण और बाल विकास विभाग का है मामला 




कोटद्वार। उत्तराखंड में सरकारी विभागों के अधिकांश विभागों में भारत सरकार की जनता के प्रति जवाबदेही के अधिकार सूचना के अधिकार 2005 के अंतर्गत सूचनाओं को देने में आनाकानी करना आम सी बात होने लगी है। जवाबदेह अधिकारी अपने को संविधान से बड़ा साबित करने पर तुले हैं । कुछ तो मांगी गईं सूचनाओं को आधा अधूरा तो कुछ का उत्तर ऐसा देते हैं जिसका न सिर होता है न पैर।

 ऐसा ही कुछ मामला कोटद्वार पदमपुर निवासी श्रीमती अरुणा बुडाकोटी पत्नी स्व राकेश चंद्र बुडाकोटी के साथ प्रकाश में आया। मामले के अनुसार अरुणा बुडाकोटी द्वारा महिला सशक्तिकरण और बाल विकास विभाग के पौड़ी, देहरादून व बाल विकास मंत्रालय व मुख्यमंत्री कार्यालय से 21-8-2025 को 4 बिन्दुओं पर सूचना मांगी थी। जिसकी प्रतिक्रिया स्वरूप बालविकास एवं महिला सशक्तीकरण अनुसचिव/लोक सूचना अधिकारी प्रभा आर्या द्वारा पौड़ी के जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेन्द्र प्रसाद थपलियाल को 1 एवं 4 बिंदु पर सूचना देने को कहा जिस पर विभाग द्वारा अपिलार्थी अरुणा को सूचना उपलब्ध करवाई गई परन्तु अपिलार्थी अरुणा आधी-अधूरी और अस्पष्ट सूचना से संतुष्ट नहीं हुई और राज्य सूचना आयोग के अध्यक्ष में दलीप सिंह कुंवर के दरबार में पहुंच गई।

 राज्य सूचना आयोग के दरबार में दोनों पक्षों की कार्यवाही और अपिलार्थी के तथ्यों से सहमत होने और विभाग द्वारा अपिलार्थी को सही सूचना न देने पर 27-3-26 को दिए निर्णय में कारण बताओ नोटिस के साथ 25000 हजार का जुर्माना लगाया और अपिलार्थी अरुणा को 15 दिन के अंदर स्पष्ट और पूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाने का निर्देश दिया है।

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