उत्तराखण्ड में कानून के रक्षकों पर चला कानून का हंटर


उत्तराखण्ड में कानून के रक्षकों पर चला कानून का हंटर

   20 दरोगा हुए निलंबित, 20 पर अभी लटकी है तलवार


  उत्तराखण्ड में फर्जी तरीके,नकल माफिया के आशीर्वाद और सरकार के ढुलमुल तरीकों से हुई नियुक्तियों की परत दर परत खुलने से जहाँ पुरानी सरकारों की फजीहत हो रही है वही गलत तरीके से नियुक्ति पाए कर्मचारियों की मुसीबतें बड़ गयी है. 2015-16 में उत्तराखंड दरोगा भर्ती घोटाला मामले में भी अब बड़ी कार्यवाही हुई है। मामले में 20 संदिग्ध सब इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है। हालांकि इस बात की आशंका है कि, आने वाले दिनों में कुछ और संदिग्ध दरोगा भी निलंबित हो सकते हैं। फिलहाल विजिलेंस साक्ष्य सबूत एकत्र कर विवेचना में जुटी है।

उत्तराखण्ड अपराध एवं कानून व्यवस्था के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG Crime and Law and Order) वी. मुरूगेशन ने बताया कि, वर्ष 2015-16 उपनिरीक्षक सीधी भर्ती में अनियमित्ता होने की जांच विजिलेंस द्वारा की जा रही है। विजिलेंस ने अभी तक की जांच पर प्रेषित रिपोर्ट के क्रम में 20 उपनिरीक्षक संदिग्ध पाए गए, जिन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित किया गया है। इस बाबत सम्बन्धित जनपद प्रभारियों को निर्देशित कर दिया गया है।


गौरतलब है कि उत्तराखण्ड अधिनस्थ चयन आयोग की नकल परीक्षा में पकड़े गए आरोपियों ने 2015-16 में हुई दरोगा भर्ती में भी नकल करने की बात स्वीकारी जिसके चलते करीब 40  दरोगा विजीलेन्स की जांच टारगेट में आ गए. सोमवार को आखिर कार 20 दरोगाओं पर गाज गिर ही गई. आठ साल पहले 339 पदों पर सीधी भर्ती में हुई दरोगा भर्ती परीक्षा की जिम्मेदारी गोविन्द बल्लभ पंत यूनिवर्सिटी की थी. उस समय भी दरोगा भर्ती में हुए घालमेल को लेकर काफी हो हल्ला हुआ था लेकिन सरकार ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया.

  कोटद्वार में भी तैनात रह चुके हैं दो फर्जी तरीके से भर्ती हुए दरोगा. देखें लिस्ट - 





Post a Comment

0 Comments