उत्तराखंड भाजपा सरकार की गले फांसी बनता अंकिता भंडारी वीआईपी कांड
उत्तराखंड में अंकिता भंडारी को न्याय मांग को लेकर हो रहे जनांदोलन धीरे धीरे जनाक्रोश में
सोमवार को पूर्व सैनिक संगठन के आह्वान पर कोटद्वार में जबरदस्त जनांदोलन रैली
भाजपा को छोड़कर उत्तराखंड के समस्त राजनीतिक, सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर सरकार को दिखाया जनाक्रोश
कोटद्वार। सोमवार को मासूम अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े गरमगोस्त के शौकीन भाजपा के वीआईपियों के शोसल मिडिया में पूर्व भाजपा विधायक की कथित धर्मपत्नी के आडियो और वीडियो ने मचाई बबाल को लेकर पूरे उत्तराखंड में भूचाल आ गया जिसको लेकर आमजन से लेकर पूर्व सैनिकों, मातृशक्ति, युवा, राजनीतिक दल और सामाजिक संगठनों ने कोटद्वार में एकजुट होकर हजारों की संख्या में विशाल रैली निकालकर सीबीआई जांच और वीआईपी के नाम के खुलासे को लेकर सरकार को चेताया है कि अगर सरकार ने जनता की मांग ठुकराई तो सरकार को और भाजपाइयों को उत्तराखंड की जनता का नाप भोगना होगा।
सोमवार को कोटद्वार में पूर्व सैनिक संगठन के नेतृत्व में कोटद्वार की भाजपाई महिलाओं, कार्यकर्ताओं को छोड़कर पूरे कोटद्वार की जनता के लगभग प्रत्येक परिवार के सदस्यों ने भागीदारी कर जता दिया कि अब उत्तराखंड की जनता महिलाओं, बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार सहन नहीं करेंगे। वहीं मासूम अंकिता को पूर्ण न्याय दिलाने के लिए कानूनी दायरे में किसी भी हद से गुजर जाएंगे।
सोमवार की जनाक्रोश रैली बहुत ही अनुशासित तरीके से आयोजित हुई। वक्ताओं ने भाजपा सरकार को चेताते हुए कहा कि एक तरफ भाजपा सरकार बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान का लेकर राज्य भर में मुहिम चला रही है वहीं उसके वीआईपी पहाड़ की बेटियों को विशेष सर्विस के नाम पर शारीरिक शोषण कर रहे हैं नहीं मानने पर अंकिता भंडारी की तरह दर्दनाक मौत दे रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की भूमि सैनिक पृष्ठभूमि के वीरों की भूमि है,जब वे सीमाओं पर देश पर आंच नहीं आने दे सकते तो अपनी बहन बेटियों को बचाने के लिए भी बलिदान देने में पीछे नहीं हटेंगे। इसलिए जब नोबल मीडिया में वीआईपियों के नाम उजागर हो रहे हैं तो उनकी सीबीआई जांच से सरकार का कतराना जता रहा कि अभी की वीआईपी और हैं जिन्हें सरकार बचाने का काम कर रही है।
वक्ताओं ने कहा कि अगर शीघ्र ही विशेष सर्विस देने वाले वीआईपियों की सीबीआई जांच नहीं हुई तो इसका परिणाम भाजपा सरकार और भाजपाइयों को आने वाले राजनीतिक मंचों पर भुगतना होगा।

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